हिमालय का महाकुंभ शुरू: मां नंदा की तीनों डोलियां कैलाश के लिए रवाना, 30 सितंबर को होमकुंड में होगा समापन
चमोली: हिमालय के महाकुंभ के रूप में प्रसिद्ध मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा 2026 का शुभारंभ हो गया है। शनिवार, 5 सितंबर 2026 को सिद्धपीठ कुरुड़ से मां नंदा राजराजेश्वरी की तीनों डोलियां कैलाश के लिए रवाना हुईं। डोलियों के प्रस्थान करते ही पूरा कुरुड़ क्षेत्र ‘जय मां नंदा’ के जयकारों से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक यात्रा में चमोली समेत उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
सिद्धपीठ कुरुड़ में पांच दिवसीय पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद मां नंदा की डोलियों को कैलाश के लिए विदाई दी गई। विदाई के भावुक क्षणों में श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भक्तों ने मां नंदा की डोली के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और यात्रा के निर्विघ्न एवं सफल होने की कामना की।
280 किलोमीटर की कठिन हिमालयी यात्रा
मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा करीब 280 किलोमीटर लंबी पैदल धार्मिक यात्रा है। लोकमान्यता और परंपरा के अनुसार मां नंदा अपने मायके से ससुराल कैलाश की ओर प्रस्थान करती हैं। सामान्य लोकजात यात्रा जहां वेदनी बुग्याल तक पहुंचती है, वहीं बड़ी जात यात्रा का मार्ग आगे बढ़कर होमकुंड तक जाता है।
कुरुड़ से रवाना होने के बाद मां नंदा की डोली निर्धारित पड़ावों से गुजरते हुए हिमालयी क्षेत्र की ओर आगे बढ़ेगी। रास्ते में ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालु डोली का स्वागत करेंगे। जगह-जगह पूजा-अर्चना, पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और मां नंदा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय रहेगा।
12 सितंबर को रामणी में होगा देव डोलियों का मिलन
यात्रा के तय कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न पड़ावों से होते हुए मां नंदा की यात्रा 12 सितंबर को रामणी पहुंचेगी। यहां विभिन्न देव डोलियों और छंतोलियों का मिलन होगा। इसके बाद यात्रा आला, सितेल और कनोंल होते हुए आगे बढ़ेगी।
15 सितंबर को मां नंदा की डोली का प्रवास वाण स्थित लाटू मंदिर में होगा। इसके बाद डोली वाण से गैरोली पाताल की ओर बढ़ेगी और 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल पहुंचेगी। यहां सप्तमी की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न होगी।
19 सितंबर को यात्रा बगुवावासा, पातरनचैणियां, कैलवा विनायक, रूपकुंड और ज्यूंरागली होते हुए शिलासमुद्र पहुंचेगी।
30 सितंबर को होमकुंड में होगा बड़ी जात का समापन
बड़ी जात यात्रा का मुख्य धार्मिक अनुष्ठान 30 सितंबर 2026 को होमकुंड में प्रस्तावित है। यहां मां नंदा की डोली की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद बड़ी जात यात्रा का समापन होगा।
12 वर्ष के अंतराल के बाद आयोजित हो रही इस बड़ी जात यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। चमोली के साथ ही प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से लोग मां नंदा की इस पवित्र यात्रा में शामिल होने पहुंच रहे हैं। यात्रा के पड़ावों पर पारंपरिक रीति-रिवाज, ढोल-दमाऊं और मां नंदा के जयकारे उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं।
मां नंदा की बड़ी जात यात्रा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक परंपरा, संस्कृति और हिमालय से गहरे रिश्ते का जीवंत प्रतीक भी है।