BRICS क्या है? जानिए सदस्य देश, इतिहास और भारत के लिए इसका महत्व

नई दिल्ली: BRICS आज दुनिया के प्रमुख बहुपक्षीय समूहों में शामिल है। आर्थिक सहयोग से लेकर वैश्विक राजनीति, व्यापार, ऊर्जा, वित्त और विकास जैसे मुद्दों पर BRICS के सदस्य देश आपसी समन्वय करते हैं। भारत भी इस समूह का संस्थापक सदस्य है और BRICS की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

BRICS क्या है?

BRICS एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग समूह है, जिसमें वर्तमान में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, मिस्र, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं।

यह समूह मुख्य रूप से आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय सहयोग के लिए सदस्य देशों को एक साझा मंच उपलब्ध कराता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को मजबूत करना भी BRICS के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल रहा है।

कैसे पड़ा BRICS नाम?

BRICS की शुरुआत आज के स्वरूप से काफी पहले हुई थी। वर्ष 2001 में ब्रिटिश अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने ब्राजील, रूस, भारत और चीन की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए BRIC शब्द का इस्तेमाल किया था।

बाद में इन देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग बढ़ा और BRIC एक औपचारिक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित हुआ।

2009 में हुई पहली BRIC शिखर बैठक

BRIC देशों का पहला औपचारिक शिखर सम्मेलन वर्ष 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ। इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया।

इसके बाद सदस्य देशों के बीच नियमित शिखर सम्मेलन और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की व्यवस्था विकसित होती गई।

दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से बना BRICS

सितंबर 2010 में दक्षिण अफ्रीका को समूह में शामिल किया गया। इसके बाद BRIC का नाम बदलकर BRICS कर दिया गया। दक्षिण अफ्रीका ने वर्ष 2011 में आयोजित तीसरे शिखर सम्मेलन में पूर्ण सदस्य के रूप में हिस्सा लिया।

2024 में तेजी से हुआ विस्तार

BRICS का बड़ा विस्तार वर्ष 2024 में हुआ। ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात नए सदस्य के रूप में समूह में शामिल हुए।

इसके बाद इंडोनेशिया वर्ष 2025 की शुरुआत में आधिकारिक रूप से BRICS का सदस्य बना। इसके साथ ही वह दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला BRICS सदस्य बन गया।

सऊदी अरब को भी सदस्यता के लिए आमंत्रित किया गया था, हालांकि उसकी सदस्यता को लेकर सार्वजनिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं रही है।

BRICS का आर्थिक महत्व

BRICS के सदस्य देश दुनिया की अर्थव्यवस्था और आबादी का एक बड़ा हिस्सा रखते हैं। यही वजह है कि इस समूह को वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण माना जाता है।

सदस्य देशों ने आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग को बढ़ाने के लिए कई संस्थागत व्यवस्थाएं विकसित की हैं। इनमें न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और BRICS आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था प्रमुख हैं।

समूह के भीतर सदस्य देशों की अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने पर भी चर्चा होती रही है। इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की व्यापक बहस से जोड़कर देखा जाता है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है BRICS?

भारत के लिए BRICS केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

BRICS के जरिए भारत रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अन्य सदस्य देशों के साथ व्यापार, ऊर्जा, निवेश, तकनीक, कनेक्टिविटी और वैश्विक मुद्दों पर संवाद करता है।

भारत की G20 में भी महत्वपूर्ण भूमिका है और BRICS के मूल सदस्य देशों के साथ-साथ इंडोनेशिया भी G20 का सदस्य है। ऐसे में दोनों बहुपक्षीय मंचों के बीच सहयोग भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए अहम माना जाता है।

BRICS को लेकर अलग-अलग राय

BRICS को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग राय है। कुछ विशेषज्ञ इसे वैश्विक व्यवस्था में उभरते देशों के प्रभाव को बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण समूह मानते हैं। वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सदस्य देशों की राजनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताएं अलग-अलग होने के कारण समूह के भीतर एकजुटता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इसके बावजूद नए देशों के जुड़ने और आर्थिक एवं बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों के कारण BRICS लगातार अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

BRICS एक नजर में

  • शुरुआती समूह: ब्राजील, रूस, भारत और चीन

  • पहला औपचारिक शिखर सम्मेलन: 2009, येकातेरिनबर्ग

  • दक्षिण अफ्रीका शामिल: 2010

  • BRICS विस्तार: 2024

  • इंडोनेशिया की सदस्यता: 2025

  • मुख्य क्षेत्र: अर्थव्यवस्था, व्यापार, वित्त, ऊर्जा, विकास और बहुपक्षीय सहयोग

  • प्रमुख संस्थान: न्यू डेवलपमेंट बैंक और आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था